
IIT बॉम्बे: आईआईटी बॉम्बे के दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की संदिग्ध मौत के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच तेज कर दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अब तक 40 लोगों के आधिकारिक बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच के दौरान साहिल के माता-पिता, उसके सहपाठियों, हॉस्टल स्टाफ और संस्थान के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। जांच टीम साहिल की मौत से ठीक पहले की घटनाओं और उससे जुड़े कारणों की कड़ियों को समझने की कोशिश कर रही है। इसके लिए उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल सबूतों से मामले से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
डिजिटल उपकरण FSL भेजे गए
मामले के तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए साहिल के दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक टैबलेट को कलिना स्थित फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया है। इन उपकरणों को अनलॉक कर उनका डेटा रिकवर किया जाएगा। पुलिस का मानना है कि डिजिटल डेटा से साहिल की मौत से पहले के घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मिल सकते हैं। साहिल के माता-पिता दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में पिछले तीन दिनों से अपने बेटे के लिए इंसाफ की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि साहिल को संस्थान में गंभीर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
साहिल के पिता की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। पिता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया है कि आखिरी बार जब वह साहिल से मिले थे, तब उसने बताया था कि प्रोफेसर दूल्ला, आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे के इशारे पर पिछले तीन महीनों से उसे जातिसूचक ताने दे रहे थे और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। साहिल ने यह डर भी जताया था कि उसे किसी झूठे मामले में फंसाया जा सकता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर में नामजद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का बयान अभी दर्ज किया जाना बाकी है। 22 वर्षीय साहिल वाकोड़े 18 सितंबर की शाम अपने हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला था। इससे कुछ घंटे पहले मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान उस पर मोबाइल फोन के जरिए ChatGPT का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था और उसे पकड़ा गया था। घटना के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने भी मामले की आंतरिक जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था। फिलहाल मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच मामले से जुड़े लोगों के बयान, डिजिटल सबूत और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। जांच के दौरान फोरेंसिक लैब से मिलने वाले डिजिटल डेटा से मामले की परिस्थितियों से जुड़ी अहम कड़ियों के सामने आने की उम्मीद है।