
उत्तर प्रदेश: नगर में दस दिनों से चल रहे गणेश चतुर्थी उत्सव का गुरुवार को धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ समापन हुआ। उत्सव के अंतिम दिन नगर में गणेश प्रतिमा विसर्जन यात्रा निकाली गई। इससे पहले आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया। उत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद गणेश प्रतिमा को आकर्षक ढंग से सजाया गया। इसके बाद गाजे-बाजे और डीजे की धुन के बीच विसर्जन यात्रा शुरू हुई। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। श्रद्धालु अबीर-गुलाल उड़ाते हुए गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। डीजे की धुन पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया। वहीं महिलाओं और बच्चों ने भी उत्साह के साथ विसर्जन यात्रा में हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान पूरे नगर में धार्मिक माहौल बना रहा।
जयकारों से गूंजा नगर, जगह-जगह हुआ स्वागत
गणेश प्रतिमा विसर्जन यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा के आगे श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए चल रहे थे, जबकि पीछे बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। गणपति बप्पा के जयकारों से नगर का माहौल भक्तिमय हो गया। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर विसर्जन यात्रा का स्वागत किया। विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। अबीर-गुलाल के बीच श्रद्धालु गणपति की भक्ति में नजर आए। युवाओं ने डीजे की धुन पर नृत्य किया, जबकि महिलाओं और बच्चों ने भी यात्रा में शामिल होकर उत्सव के समापन को यादगार बनाया।
यात्रा को लेकर पुलिस भी मुस्तैद रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी यात्रा के दौरान मौजूद रहे। नगर के प्रमुख मार्गों से यात्रा के गुजरने के दौरान व्यवस्था पर नजर रखी गई। विसर्जन यात्रा नगर से होते हुए बेतवा नदी पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और इसके बाद गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया। प्रतिमा विसर्जन के साथ ही नगर में दस दिनों से चल रहे गणेश उत्सव का समापन हो गया। दस दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान नगर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अंतिम दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन से पहले भव्य भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद श्रद्धालु विसर्जन यात्रा में शामिल हुए और गणपति बप्पा के जयकारों के साथ प्रतिमा को बेतवा नदी तक लेकर पहुंचे।