
उत्तर प्रदेश: उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत मोनाड विश्वविद्यालय में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ, सशक्त एवं नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना रहा। इस दौरान विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक एवं रचनात्मक गतिविधियों में लगाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ऋचा यादव मौजूद रहीं। कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. मूलराज सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. महीप मिश्रा और डॉ. पवन शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। दोनों वक्ताओं ने नशे के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के साथ-साथ इससे बचने के विभिन्न उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी। डॉ. महीप मिश्रा ने कहा कि नशामुक्त भारत का निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नशे का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होता है। ऐसे में नशे की समस्या को रोकने के लिए परिवार और समाज दोनों स्तरों पर जागरूकता और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने परिवारों से बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही युवाओं को खेलकूद, कला और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की बात कही, ताकि उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिल सके।
नशे से दूर रहने का दिया संदेश
डॉ. महीप मिश्रा ने कहा कि नशे की लत से प्रभावित लोगों के प्रति उपेक्षा का रवैया अपनाने के बजाय उनके साथ संवेदनशीलता और सहयोग की भावना रखनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को चिकित्सा और परामर्श केंद्रों तक पहुंचाने में मदद की जानी चाहिए। उन्होंने नशामुक्ति से संबंधित सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 14446 की जानकारी भी दी। उन्होंने युवाओं से ऐसी ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया, जिससे वे राष्ट्रप्रेम, समाजसेवा, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा तथा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित हों। वहीं डॉ. पवन शर्मा ने विद्यार्थियों को अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए रचनात्मक गतिविधियों को प्राथमिकता देने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. मूलराज सिंह ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद उन्होंने नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए मौजूद लोगों को शपथ दिलाई। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम में डॉ. सोमा दास, डॉ. प्रताप सिंह और विकास त्यागी सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. रीतू चिक्कारा ने मुख्य अतिथि, वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी से लगातार सहयोग करने का आह्वान किया। सेमिनार के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचने और स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।