
ग्रेटर नोएडा: शहर के अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा समेत आसपास के सेक्टरों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से पिछले कई दिनों से सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अलग-अलग सेक्टरों में सफाई कर्मचारियों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से सफाई का काम किया जा रहा है। सफाई अभियान को लेकर प्राधिकरण की सराहना भी हो रही है, लेकिन इसी बीच शहर में खुले नालों और क्षतिग्रस्त नालियों की समस्या लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
ग्रेटर नोएडा में हाल ही में एक नंदी के खुले नाले में गिरने का वीडियो सामने आया था। इसके बाद जेसीबी की मदद से नंदी को नाले से बाहर निकाला गया था। अब इसी तरह का एक और मामला म्यू-1 गोलचक्कर के पास सामने आया है। यहां एक गाय खुले नाले में फंस गई और करीब चार घंटे तक उसी में फंसी रही। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर गाय को बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए गए। नितिन नायक ने इसकी सूचना गौसेवा से जुड़े स्थानीय लोगों को दी। जानकारी मिलते ही गौसेवक मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद गाय को नाली से सकुशल बाहर निकाल लिया।
खुले नालों और टूटी नालियों पर उठ रहे सवाल
शहर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद खुले नालों और टूटी नालियों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि एक ओर प्राधिकरण की ओर से विभिन्न सेक्टरों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर खुले नालों और क्षतिग्रस्त नालियों की समस्या अब भी बनी हुई है। म्यू-1 गोलचक्कर के पास गाय के करीब चार घंटे तक नाली में फंसे रहने की घटना ने इस समस्या को फिर सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गाय गोलचक्कर के बजाय किसी सुनसान स्थान पर नाली में फंसती तो संभव है कि समय पर किसी की नजर उस पर नहीं पड़ती। ऐसी स्थिति में उसकी जान को भी खतरा हो सकता था।
शहर में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ खुले नालों को ढकने और टूटी नालियों की मरम्मत कराने की जरूरत भी बताई जा रही है। इससे पशुओं के साथ-साथ लोगों के लिए भी संभावित हादसों को रोका जा सकता है। अब देखना होगा कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस समस्या को लेकर संबंधित स्थानों का निरीक्षण कराता है या नहीं और खुले नालों तथा क्षतिग्रस्त नालियों को दुरुस्त कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।