हाथी दिवस पर विशेष: उत्तराखंड में हाथी भर रहे झोलियां, पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था तक दे रहे बढ़ावा

हाथी दिवस पर विशेष: उत्तराखंड में हाथी केवल जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के प्रहरी नहीं हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं। यमुना से शारदा नदी तक राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत 13 वन प्रभागों के करीब 6643.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगलों में हाथियों की मौजूदगी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है। हर साल पर्यटक सीजन के दौरान बड़ी संख्या में सैलानी राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पहुंचते हैं। 15 नवंबर से 15 जून तक चलने वाले पर्यटन सीजन में पर्यटक हाथियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने के लिए भी इन क्षेत्रों का रुख करते हैं। एशियाई हाथियों की प्रमुख सैरगाह राजाजी टाइगर रिजर्व की बात करें तो पिछले पर्यटन सीजन में रिजर्व को 3.46 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा रिजर्व से जुड़ी ईको विकास समितियों के साथ आसपास के होटल, रिसॉर्ट और होम स्टे संचालकों को भी पर्यटन गतिविधियों से आय होती है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी हाथी पर्यटन को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लगातार बढ़ रही हाथियों की संख्या

राष्ट्रीय विरासत पशु हाथी के संरक्षण के लिए राज्य में किए जा रहे प्रयासों का असर इनकी संख्या में भी देखने को मिला है। वर्ष 2007 में उत्तराखंड में हाथियों की संख्या 1346 आंकी गई थी। वर्ष 2020 में हुई पिछली गणना में यह संख्या बढ़कर 2026 हो गई। अब राज्य में हाथियों की नई गणना भी पूरी हो चुकी है और इसके परिणाम जल्द जारी किए जाने की उम्मीद है। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार, हाथियों के संरक्षण के लिए गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं।

हाथियों की भूमिका केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। राजाजी टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए हाथी सफारी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पिछले साल से रिजर्व में दो रूट पर हाथी सफारी कराई जा रही है। इसके लिए राधा और रंगीली नाम की दो हाथिनियों की सेवाएं ली जाती हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व में नौ पालतू हाथी हैं। वर्षाकाल के दौरान इन हाथियों का इस्तेमाल जंगल की सुरक्षा के लिहाज से गश्त में भी किया जाता है। वहीं कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 14 पालतू हाथी हैं, जो सफारी के साथ-साथ वन सुरक्षा गतिविधियों में भी योगदान दे रहे हैं। उत्तराखंड के कई वन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अलावा देहरादून, लैंसडौन, कालसी, हरिद्वार, नरेंद्रनगर, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, रामनगर, हल्द्वानी, तराई पश्चिमी और चंपावत वन प्रभाग शामिल हैं। इस तरह उत्तराखंड में हाथी जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और वन सुरक्षा से भी जुड़े हुए हैं। हाथियों की बढ़ती संख्या राज्य में उनके संरक्षण के प्रयासों के परिणामों की ओर भी संकेत करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *