
नोएडा: सेक्टर-51/52 में मेट्रो यात्रियों की सुविधा के लिए तैयार किए गए 460 मीटर लंबे स्काईवॉक का शुभारंभ विधायक पंकज सिंह ने किया। करीब 36.90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस स्काईवॉक के शुरू होने से दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। यह स्काईवॉक डीएमआरसी और एनएमआरसी के मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इससे यात्रियों को सड़क पार करने की परेशानी से राहत मिलेगी और मेट्रो स्टेशन तक पहुंचना पहले के मुकाबले आसान होगा। खासतौर पर पैदल मेट्रो यात्रियों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधायक पंकज सिंह के मुताबिक, स्काईवॉक के शुरू होने से प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को अब एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क पर वाहनों के बीच से गुजरने या सड़क पार करने की परेशानी कम होगी।
धूप और बारिश से भी मिलेगी राहत
स्काईवॉक का एक प्रमुख फायदा यह भी होगा कि पैदल यात्रियों को मौसम की मार से राहत मिलेगी। धूप और बारिश के दौरान यात्रियों के लिए मेट्रो स्टेशनों के बीच पैदल आवागमन आसान होगा। इससे रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले लोगों के समय और परेशानी दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
शुभारंभ के अवसर पर विधायक पंकज सिंह और संबंधित अधिकारियों ने स्काईवॉक का निरीक्षण किया। विधायक ने स्वयं पैदल चलकर स्काईवॉक का जायजा लिया और वहां उपलब्ध सुविधाओं को देखा। अधिकारियों के साथ उन्होंने यात्रियों के आवागमन और स्काईवॉक की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। 460 मीटर लंबा यह स्काईवॉक सेक्टर-51 और सेक्टर-52 के मेट्रो स्टेशनों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इसके शुरू होने के बाद यात्रियों को दोनों मेट्रो नेटवर्क के बीच पैदल आने-जाने के लिए अधिक सुविधाजनक रास्ता मिलेगा। नोएडा में मेट्रो से रोजाना बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। ऐसे में इस स्काईवॉक के संचालन से पैदल यात्रियों को विशेष सुविधा मिलने की उम्मीद है। सड़क पार करने की समस्या कम होने के साथ ही धूप और बारिश के दौरान भी यात्रियों का आवागमन सुगम होगा।
शुभारंभ के बाद अब स्काईवॉक यात्रियों के लिए उपलब्ध है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इसकी सुविधाओं का निरीक्षण भी किया गया है। करीब 36.90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना से रोजाना 15 से 20 हजार यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।