
भरुआ सुमेरपुर: महान क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती के अवसर पर वर्णिता संस्था की ओर से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस दौरान उनके राष्ट्रसेवा के योगदान और स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष को याद किया गया। विमर्श विविधा के तहत आयोजित ‘जिनका देश ऋणी है’ कार्यक्रम में वक्ताओं ने श्यामजी कृष्ण वर्मा के जीवन और देश के प्रति उनके समर्पण पर प्रकाश डाला। संस्था अध्यक्ष डॉ. भवानीदीन ने कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा ने महज 20 वर्ष की उम्र में स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष में कदम रखा था। उन्होंने अपने जीवन को देश की स्वतंत्रता और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचारों और गतिविधियों ने उस दौर में भारतीय युवाओं के बीच राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में बताया गया कि श्यामजी कृष्ण वर्मा ने ऑक्सफोर्ड से संस्कृत में एमए और बार-एट-लॉ की शिक्षा प्राप्त की थी। विदेश में रहते हुए भी उनका जुड़ाव भारत की स्वतंत्रता के विचार से बना रहा। इंग्लैंड में उन्होंने इंडिया हाउस की स्थापना की, जिसे भारतीय युवाओं के बीच क्रांतिकारी विचारों और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में याद किया जाता है।
लोकमान्य तिलक और स्वामी दयानंद के विचारों से थे प्रभावित
वक्ताओं ने बताया कि श्यामजी कृष्ण वर्मा लोकमान्य तिलक और स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रभावित थे। उनके विचारों का प्रभाव आगे चलकर कई युवाओं पर पड़ा। वीर सावरकर भी उनसे प्रेरित हुए। श्यामजी कृष्ण वर्मा ने विदेश में रहते हुए भारत की आजादी के लिए वैचारिक और संगठनात्मक स्तर पर योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान उनके संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और देश के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा गया कि उनका जीवन आज भी युवाओं को देशहित और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है। वक्ताओं ने उनके विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। श्यामजी कृष्ण वर्मा का निधन 31 मार्च 1930 को जिनेवा में हुआ था। हालांकि उनके जीवन का संघर्ष आजादी के दौर से जुड़ा रहा, लेकिन राष्ट्रसमर्पण और देशसेवा से जुड़े उनके विचार आज भी प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं। इस अवसर पर अशोक अवस्थी, सिद्धा, बाबूलाल प्रजापति, महावीर प्रजापति, रामनरायन सोनकर, भोलू सिंह, पंकज सिंह, राहुल, सत्येंद्र और अखिलेश सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी ने श्यामजी कृष्ण वर्मा के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।