
ग्रेटर नोएडा: मेट्रो यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग और संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का लक्ष्य शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और वैश्विक स्तर पर सहयोग के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना है। विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डाकी एग्री सर्विस, बुर्किना फासो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मौसा कोनाटे, यूकोबो यूनिवर्सिटी एवं कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट अफ्रीका की यूनिवर्सिटी यूनिट इन बोबो-डिउलासो (CUWA-UUB), बेनिन के अध्यक्ष प्रो. गैस्टन ओई कोसी और ITDFC के कार्यक्रम समन्वयक श्री हर्ष उपस्थित रहे। इस समझौते के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के बीच संपर्क और सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुसंधान तथा कौशल विकास से जुड़े अवसरों को प्रोत्साहित करना है।
विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों पर जोर
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की प्रो-चांसलर डॉ. सुनीता सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौते विद्यार्थियों के लिए वैश्विक अवसरों के नए द्वार खोलने और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस प्रकार की साझेदारी को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कुलपति डॉ. राजेश पाठक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग से विद्यार्थियों और शिक्षकों को ज्ञान, अनुसंधान तथा कौशल विकास के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। इस तरह की पहल से शैक्षणिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, रजिस्ट्रार डॉ. राकेश धर द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे समझौतों के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने और संस्थागत विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों के डीन भी उपस्थित रहे। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग को विस्तार देने, शैक्षणिक साझेदारी मजबूत करने और भविष्य में संयुक्त गतिविधियों की संभावनाओं पर चर्चा की गई। मेट्रो यूनिवर्सिटी में हुआ यह समझौता विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है। इसके जरिए विद्यार्थियों को व्यापक शैक्षणिक और व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने तथा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।