
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज आराध्या यादव ने रणजी ट्रॉफी 2026-27 में बिहार के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। टूर्नामेंट के पहले मैच में आराध्या ने 147 गेंदों पर 84 रन की संयमित पारी खेली। उनकी इस पारी में सात चौके और दो छक्के शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 57.14 रहा। क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी करने और सही समय पर रन बनाने की उनकी क्षमता इस पारी में देखने को मिली। आराध्या यादव का प्रदर्शन केवल एक अच्छी पारी तक सीमित नहीं है। जूनियर क्रिकेट से लेकर सीनियर स्तर तक उनका सफर निरंतरता, मेहनत और तकनीकी कौशल से जुड़ा रहा है। विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी में भी अपनी उपयोगिता साबित करने वाले आराध्या ने अलग-अलग आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई है। बिहार के खिलाफ उनकी पारी ने एक बार फिर घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन को चर्चा में ला दिया है।
अंडर-16 से रणजी तक शानदार सफर
आराध्या यादव ने जूनियर क्रिकेट में ही अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनानी शुरू कर दी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंडर-16 स्तर पर वह भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल रहे। जूनियर क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने आगे के सफर के लिए मजबूत आधार तैयार किया। आराध्या 2022 में आईसीसी अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम और अंडर-19 एशिया कप विजेता टीम का भी हिस्सा रहे। इन प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम की सफलता उनके क्रिकेट करियर का अहम पड़ाव रही। जूनियर स्तर से आगे बढ़ते हुए उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी जगह बनाई और अब उत्तर प्रदेश की सीनियर टीम के लिए भी योगदान दे रहे हैं।
कर्नल सी.के. नायडू ट्रॉफी में भी आराध्या का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। उन्होंने एक ही सत्र में 1,000 से अधिक रन बनाने का कारनामा किया। इसी प्रतियोगिता में उनकी 327 रन की पारी विशेष रूप से यादगार रही। इस पारी की खास बात यह बताई गई है कि 300 रन पूरे करने तक उन्होंने कोई हवाई शॉट नहीं खेला। उन्होंने लगभग 74 के स्ट्राइक रेट से क्लासिक क्रिकेटिंग शॉट्स लगाते हुए लंबी पारी खेली। यह प्रदर्शन उनकी तकनीक और क्रीज पर धैर्य के लिए उल्लेखनीय रहा। रणजी ट्रॉफी में भी आराध्या यादव पहले शतक लगा चुके हैं। बिहार के खिलाफ 84 रन की पारी के साथ उन्होंने नए सत्र की शुरुआत प्रभावशाली अंदाज में की। 147 गेंदों तक क्रीज पर टिके रहकर बल्लेबाजी करना उनकी पारी का अहम पहलू रहा। सात चौकों और दो छक्कों की मदद से उन्होंने अपनी पारी को आगे बढ़ाया और टीम के लिए उपयोगी रन जोड़े।
विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी में संतुलन
आधुनिक क्रिकेट में तेजी से रन बनाने के साथ-साथ पारी को संभालने की क्षमता भी अहम होती है। आराध्या यादव की बल्लेबाजी में धैर्य और तकनीक का संतुलन दिखाई देता है। लाल गेंद के क्रिकेट में लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण होता है। बिहार के खिलाफ उनकी पारी में भी यही संयम देखने को मिला। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में आराध्या की भूमिका टीम के लिए महत्वपूर्ण है। विकेट के पीछे जिम्मेदारी निभाने के साथ बल्लेबाजी में योगदान देना उन्हें एक उपयोगी खिलाड़ी बनाता है। जूनियर क्रिकेट की उपलब्धियों, कर्नल सी.के. नायडू ट्रॉफी में बड़े स्कोर और रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन के जरिए उन्होंने अपने करियर में अलग-अलग स्तरों पर निरंतरता दिखाई है। गाजियाबाद से निकलकर अंडर-19 विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा बनने और उत्तर प्रदेश की सीनियर टीम तक पहुंचने का आराध्या यादव का सफर युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणादायक है। रणजी ट्रॉफी 2026-27 में बिहार के खिलाफ उनकी 84 रन की पारी ने उनके अनुभव, धैर्य और बल्लेबाजी कौशल को फिर से सामने रखा है।