
मथुरा: मथुरा की धर्मनगरी गोवर्धन में परिक्रमा के दौरान हुए सड़क हादसे में पत्नी को खोने वाले पति ने अब न्याय के लिए पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है। पीड़ित ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर 14 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय मथुरा पहुंचकर प्रार्थना पत्र सौंपा। उसने घटना की निष्पक्ष जांच कराने, ई-रिक्शा चालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और अब तक हुई पुलिस कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। पीड़ित गिर्राज सिंह पुत्र श्री बादाम सिंह, निवासी पीएनबी बैंक के पास, खुर्जा, जनपद बुलंदशहर ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि 20 जून 2026 की रात करीब एक बजे वह अपनी पत्नी श्रीमती श्रीदेवी के साथ गोवर्धन परिक्रमा कर रहे थे। इसी दौरान राधाकुंड के पास ई-रिक्शा संख्या UP85ET6571 ने उनकी पत्नी को टक्कर मार दी। गिर्राज सिंह का आरोप है कि ई-रिक्शा चालक तेज गति और लापरवाही से वाहन चला रहा था, जिसके चलते उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मौत
प्रार्थना पत्र के अनुसार, हादसे के बाद डायल 112 पर सूचना दी गई। पुलिस की सहायता से घायल श्रीदेवी को सरकारी अस्पताल गोवर्धन पहुंचाया गया। वहां से बेहतर उपचार के लिए उन्हें मथुरा के नीलम अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार ने अपनी पत्नी और परिजन को खो दिया। गिर्राज सिंह का कहना है कि उन्होंने हादसे के संबंध में 20 जून की सुबह करीब 6 बजकर 19 मिनट पर थाना गोवर्धन में लिखित शिकायत दी थी। पत्नी की मौत के बाद वह सुबह करीब 11 बजे तक अस्पताल में पुलिसकर्मियों के पहुंचने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने का इंतजार करते रहे। हालांकि, उनके आरोप के मुताबिक, इस दौरान कोई पुलिसकर्मी अस्पताल नहीं पहुंचा। इसके बाद वह पत्नी के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए खुर्जा स्थित अपने निवास पर ले गए।
पीड़ित ने अपने प्रार्थना पत्र में एफआईआर संख्या 0333/2026, थाना गोवर्धन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मामले में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसी को लेकर उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से दोबारा हस्तक्षेप करने की मांग की है। गिर्राज सिंह ने ई-रिक्शा चालक के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई करने और मामले की विवेचना की प्रगति आख्या उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि उन्हें मामले में हुई कार्रवाई की जानकारी मिलनी चाहिए और शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। फिलहाल, ई-रिक्शा चालक की लापरवाही और पुलिस कार्रवाई में देरी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अब देखना होगा कि पीड़ित की शिकायत पर पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है और जांच के दौरान मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं।