Amit Shah का Congress पर हमला: Vande Mataram के पूरे गान से क्यों परहेज?

Amit Shah

शाह ने इस गीत के महत्व पर ज़ोर देते हुए इसे बंकिम बाबू की एक अमर उत्कृष्ट रचना बताया, जिसने आज़ादी की लड़ाई को प्रेरित किया और आज़ाद भारत की सोच को आकार दिया। उन्होंने कहा कि इस एक गीत, इस एक साहित्यिक रचना के ज़रिए उन्होंने यह स्थापित किया कि आज़ाद भारत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी और देश के बँटवारे के बाद भी ‘वंदे मातरम’ को कभी पूरे दिल से नहीं अपनाया गया। गृह मंत्री ने ‘राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को मज़बूत करने के फ़ैसले को ऐतिहासिक निर्णय भी बताया। यह कानून राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ में किसी भी तरह की बाधा डालने या उसका अपमान करने को अपराध बनाता है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने संसद में एक बिल पेश किया और ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन को सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने का फ़ैसला किया; यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। मेरा मानना ​​है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि आने वाली पीढ़ियों हमारे बच्चों, किशोरों और युवाओं—तक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अमर संदेश पहुँचेगा।

ये बातें वंदे मातरम के गायन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद के दौरान कही गई हैं। कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने हाल ही में 1937 के एक प्रस्ताव का हवाला देते हुए घोषणा की कि पार्टी के कार्यक्रमों में इस गीत के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। 20 अगस्त को अमित शाह ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी के 1937 के फैसले ने उन हालात को बनाने में भूमिका निभाई, जिनकी वजह से भारत का विभाजन हुआ।

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