
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट से मिली छह घंटे की कस्टडी पैरोल के दौरान नीरज बवाना अपने परिवार से मिलने पहुंचा। अदालत के आदेश के तहत उसे 17 सितंबर को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक पुलिस सुरक्षा में अस्पताल और घर जाने की अनुमति दी गई थी। निर्धारित अवधि के दौरान उसने अपनी पत्नी और नवजात बच्चों से मुलाकात की और परिवार के साथ कुछ समय बिताया। बताया गया कि लंबे समय बाद परिवार से मुलाकात के दौरान नीरज बवाना ने पत्नी और बच्चों के साथ बातचीत की। इस दौरान जब उसने अपनी बेटियों का जिक्र किया तो वह भावुक नजर आया। परिवार के साथ मुलाकात उसके लिए भावनात्मक पल रही। कस्टडी पैरोल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिसकर्मी भी उसके साथ मौजूद रहे। अदालत की ओर से निर्धारित शर्तों के तहत ही उसे अस्पताल और घर जाने की अनुमति दी गई थी। पूरी अवधि के दौरान पुलिस की निगरानी में उसकी गतिविधियां कराई गईं।
अंतरिम जमानत के बजाय मिली कस्टडी पैरोल
नीरज बवाना की ओर से अदालत में अंतरिम जमानत की मांग भी की गई थी। हालांकि, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए अदालत ने अंतरिम जमानत की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बजाय उसे निर्धारित अवधि के लिए कस्टडी पैरोल की अनुमति दी गई। अदालत के आदेश के मुताबिक, 17 सितंबर को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक छह घंटे की अवधि में वह पुलिस सुरक्षा के बीच अस्पताल और अपने घर जा सका। इस दौरान उसने अपनी पत्नी और नवजात बच्चों से मुलाकात की। परिवार से मिलने के दौरान नीरज बवाना ने बेटियों का जिक्र किया और भावुक दिखाई दिया। लंबे समय बाद पत्नी और बच्चों से मुलाकात के दौरान उसने उनके साथ समय बिताया। वहीं, सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मी पूरे समय मौजूद रहे। छह घंटे की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद नीरज बवाना को पुलिस सुरक्षा में वापस ले जाया गया। इस तरह अदालत की ओर से दी गई कस्टडी पैरोल की अवधि पूरी हो गई। मामले में अंतरिम जमानत के बजाय सीमित अवधि के लिए कस्टडी पैरोल दिए जाने का फैसला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में किया गया था।