
फ्लाईदुबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान हमले में घायल हुए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बातचीत की। उस समय कैप्टन स्मित अबू धाबी के एक अस्पताल में उपचार करा रहे थे। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने मुश्किल हालात में उनकी बहादुरी, सूझबूझ और यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने खुद को संभालने की कोशिश की। उन्हें एहसास हुआ कि अगर वह उठकर कुछ नहीं करते हैं, तो विमान में सवार यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। इसके बाद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का प्रयास किया, ताकि दूसरे लोग अंदर आकर स्थिति को संभाल सकें। गंभीर चोटों के बावजूद उनकी कोशिशों का मकसद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
क्या है फ्लाईदुबई विमान में हमले का पूरा मामला?
यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी, जो दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उड़ान के दौरान ओमानी सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। हमले के दौरान विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने आपातकालीन चेतावनी देने और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना में विमान में सवार लोगों की जान बच गई। हमले के दौरान कैप्टन स्मित की ओर से उठाए गए कदम और यात्रियों की मदद से एक गंभीर स्थिति को संभालने में सफलता मिली।
प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी बहादुरी ने विमान में सवार लोगों की जान बचाने में मदद की और भारतीय पायलटों की पेशेवर प्रतिबद्धता को भी सामने रखा। पीएम मोदी का संदेश मुख्य रूप से कैप्टन स्मित के साहस और मानवीय जीवन की रक्षा के महत्व पर केंद्रित रहा। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि संकट की घड़ी में लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया कदम कितना अहम होता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं और अपुष्ट दावे भी सामने आए हैं। कुछ पोस्ट में इजरायल और अन्य पक्षों को लेकर साजिश की आशंकाएं जताई गई हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी भी अटकल को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। कैप्टन स्मित की बहादुरी की भारत के साथ-साथ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सराहना की। इस घटना ने आपातकालीन परिस्थितियों में विमान के चालक दल की भूमिका और यात्रियों की सुरक्षा के महत्व को भी सामने रखा है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और स्थिति को संभालने के लिए प्रयास किए। विमान में हमले के पीछे सह-पायलट का मकसद क्या था, इसकी जांच की जा रही है। अधिकारी घटना की परिस्थितियों और हमले के कारणों का पता लगाने में जुटे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही हमले से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल, सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और जांच में प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।