
ग्रेटर नोएडा : मध्य प्रदेश के सिंगरौली में बीजेपी विधायक रामनिवास शाह की निजी कार को फायर ब्रिगेड की गाड़ी से धोने का वीडियो हाल ही में सामने आया था। सरकारी संसाधनों के कथित निजी इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बीच अब ग्रेटर नोएडा के गामा-2 इलाके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वीडियो में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की गाड़ी से निजी कार धोने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो में एकांत स्थान पर की गाड़ी खड़ी दिखाई दे रही है। वहीं, दो व्यक्ति कथित तौर पर नगर निगम की गाड़ी से पानी लेकर अपनी निजी कार धोते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की गाड़ियों और सरकारी पानी का इस्तेमाल निजी वाहनों की धुलाई के लिए किया जा सकता है या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।
मामले को लेकर लोगों ने जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रेटर नोएडा सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर मध्य प्रदेश के सिंगरौली में उठे विवाद के बीच अब ग्रेटर नोएडा से भी एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे गामा-2 इलाके के बताए जा रहे वीडियो में सीवर सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन से निजी कार की धुलाई किए जाने का दावा किया जा रहा है।वीडियो में एक निजी कार एकांत स्थान पर खड़ी दिखाई दे रही है। उसके पास दो लोग नजर आ रहे हैं और सरकारी मशीन से पानी की धार के जरिए कार की धुलाई होती दिखाई देती है। दावा है कि यह मशीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सीवर सफाई व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली मशीन है।अगर वीडियो में किया जा रहा दावा सही पाया जाता है तो मामला सिर्फ कार धोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी खड़ा होगा कि सीवर सफाई जैसी जरूरी सार्वजनिक सेवा के लिए तैनात मशीन निजी वाहन की धुलाई के लिए किसके आदेश पर इस्तेमाल की गई?
किसके आदेश पर पहुंची मशीन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी मशीन को उस स्थान तक कौन लेकर गया? क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? क्या मशीन की लॉगबुक में इस गतिविधि का कोई रिकॉर्ड दर्ज है? और क्या सरकारी मशीन से इस्तेमाल किए गए पानी का हिसाब भी दर्ज किया गया?
जनता के संसाधन, निजी इस्तेमाल?
सरकारी मशीनरी जनता के पैसे से संचालित होती है। सीवर सफाई की मशीनों का उद्देश्य शहर की सफाई और नागरिकों से जुड़ी जरूरी सेवाएं हैं। ऐसे में यदि इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल निजी वाहन धोने के लिए किया गया है तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल हुआ है तो संबंधित कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई दे रही मशीन किस विभाग की है तथा उसका इस्तेमाल किस अनुमति के तहत किया गया। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।अब निगाहें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर हैं कि वह वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच कराता है या नहीं। यदि जांच में सरकारी मशीन के निजी इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो यह भी देखना अहम होगा कि मशीन मौके तक कैसे पहुंची, किसके निर्देश पर पहुंची और सरकारी संसाधन के कथित दुरुपयोग पर क्या कार्रवाई की जाती है।