
मथुरा: मथुरा जनपद में छाता चीनी मिल को चालू कराने और किसानों की समस्याओं को लेकर चल रहा धरना-प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। भूतपूर्व सैनिक परिषद और किसानों के आंदोलन के 63 दिन पूरे होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को कड़ी चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से धरना देने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब उन्होंने आंदोलन को और आक्रामक बनाने का ऐलान किया है। धरने पर किसान ललित कर्मयोगी ने कहा कि यदि कोई नेता या जनप्रतिनिधि किसानों के बीच आना चाहता है, तो उसे नेता बनकर नहीं, बल्कि एक साधारण किसान के रूप में आना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के समर्थन में नहीं खड़े होने वाले जनप्रतिनिधियों के अहंकार रूपी ‘कालनेमी रावण’ के पुतले का दहन किया जाएगा।
63 दिन बाद भी मांगों पर सुनवाई नहीं होने का आरोप
ललित कर्मयोगी ने कहा कि किसान पिछले 63 दिनों से खुले आसमान के नीचे धरना दे रहे हैं, लेकिन क्षेत्र के किसी सांसद या विधायक ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया। उनका आरोप है कि चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले जनप्रतिनिधि अब किसानों की परेशानी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और छाता चीनी मिल के मुद्दे पर भी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो जनप्रतिनिधि किसानों के समर्थन में आगे नहीं आएगा, उसके खिलाफ पुतला दहन कर विरोध जताया जाएगा। किसानों के इस ऐलान से आंदोलन को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को भी चेतावनी दी है कि यदि पुतला दहन रोकने का प्रयास किया गया, तो विरोध केवल चीनी मिल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों के मुताबिक, बरसाना, शेरगढ़, चौमुंहा और अन्य प्रमुख स्थानों के लिए करीब 20 पुतले तैयार किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें अलग-अलग स्थानों पर जलाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। छाता चीनी मिल को चालू कराने और किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जारी यह आंदोलन अब अधिक आक्रामक रुख लेता दिखाई दे रहा है। किसानों की चेतावनी के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।