
छाता (मथुरा): पिछले 17 वर्षों से बंद पड़ी छाता चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर चल रहा भूतपूर्व सैनिकों और किसानों का धरना लगातार जारी है। धरने के 61 दिन पूरे होने के बीच आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन तेज करने का ऐलान किया है। ललित फौजी (कर्मयोगी) के अनुसार, आगामी 20 अक्टूबर को चीनी मिल स्थित धरना स्थल पर 10 फीट ऊंचे सांकेतिक पुतले का दहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया चल रही है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग छाता गन्ना मिल को दोबारा शुरू कराने और किसानों व स्थानीय जनता से किए गए वादों को पूरा कराने की है। ललित कर्मयोगी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों ने किसानों और जनता से कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर धरना जारी है और 20 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम के माध्यम से विरोध दर्ज कराया जाएगा।
एथेनॉल प्लांट के बजाय गन्ना मिल चलाने की मांग
ललित कर्मयोगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि किसानों से वादे करके उन्हें पूरा नहीं करने वाले सांसदों और विधायकों की जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सख्त कानून बनाया जाए। उन्होंने अपने बयान में ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग भी रखी। छाता चीनी मिल के स्थान पर एथेनॉल प्लांट लगाए जाने की चर्चा का भी आंदोलनकारियों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में गन्ना मिल को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। किसानों की मांग है कि यदि जनप्रतिनिधि मिल चालू कराने में असमर्थ हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर किसानों के साथ धरना स्थल पर बैठना चाहिए। ललित कर्मयोगी के मुताबिक, 20 अक्टूबर को प्रस्तावित सांकेतिक पुतला दहन का उद्देश्य किसानों और जनता से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है। कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। आंदोलनकारियों की मांग है कि लंबे समय से बंद पड़ी छाता चीनी मिल को चालू कराने और किसानों से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाएं।