
मथुरा: छाता तहसील क्षेत्र में चीनी मिल को चालू कराने की मांग को लेकर चल रहे धरने पर माहौल गरमाता नजर आ रहा है। मथुरा में पूर्व सैनिकों की प्रेस वार्ता के बाद धरने पर बैठे किसानों ने नाराजगी जताई है। किसानों का आरोप है कि प्रेस वार्ता के दौरान एक पूर्व सैनिक ने धरनास्थल पर मौजूद किसानों के पास अवैध हथियार होने की बात कही और आंदोलन को अवैध बताते हुए इसकी तुलना जवाहर बाग कांड से की। इन बयानों से नाराज किसानों ने उन्हें निराधार बताते हुए 24 घंटे के भीतर सबूत देने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है। धरने पर मौजूद किसानों का कहना है कि चीनी मिल को चालू कराने की मांग को लेकर आंदोलन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। ऐसे में धरने को लेकर इस तरह के आरोप लगाए जाने से किसानों में रोष है। किसानों ने संबंधित पूर्व सैनिक से सवाल किया कि यदि उनके पास हथियार होने के संबंध में कोई जानकारी या साक्ष्य हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
किसानों ने सबूत देने या माफी मांगने की मांग की
धरनास्थल पर मौजूद किसान शिवराम, महावीर मास्टर, पप्पू पहलवान, लोकेश और शंकर नेता सहित अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से कहा कि यह धरना किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं है, बल्कि सर्व समाज और सर्व सरदारी का धरना है। उनके मुताबिक, चीनी मिल को चालू कराने की मांग को लेकर हर वर्ग के लोग इसमें शामिल हो रहे हैं।
किसानों ने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ बिना प्रमाण आरोप लगाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे किसानों के आंदोलन को बदनाम करने वाले बयानों को कब तक बर्दाश्त किया जाए। किसानों ने स्पष्ट किया कि चीनी मिल चालू कराने की मांग उनके आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है। किसानों ने संबंधित पूर्व सैनिक को 24 घंटे का समय देने की बात कही है। उनका कहना है कि इस अवधि में आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं या बयान के लिए माफी मांगी जाए। ऐसा नहीं होने पर किसानों ने कानूनी मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी है। फिलहाल, पूर्व सैनिक की प्रेस वार्ता में दिए गए कथित बयान को लेकर किसानों और पूर्व सैनिकों के बीच विवाद सामने आया है। किसानों ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे अपनी मांग को लेकर धरना जारी रखेंगे और आरोपों के संबंध में आगे की कार्रवाई तय समय के बाद करेंगे।