
रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्कूली विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच और नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। केंद्र सरकार की इंस्पायर–मानक योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रदेश के लगभग 40 विद्यार्थियों को शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सम्मानित किया। इस दौरान जापान जाकर सीखने का अवसर प्राप्त करने वाले पांच प्रतिभागियों को भी सम्मान दिया गया। शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों को अपने नए विचारों को उपयोगी आविष्कारों में बदलने के लिए प्रेरित किया। रायपुर के बीटीआई ग्राउंड परिसर स्थित एससीईआरटी भवन में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है। जरूरत है उसे पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर देने की। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान से जुड़े नए विचारों पर काम करने का आह्वान किया।
प्रदेश से सामने आए 80 हजार नवाचारी विचार
शिक्षा मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे आविष्कार विकसित करने चाहिए, जो आम लोगों के जीवन को आसान बनाएं और समाज की समस्याओं का समाधान कर सकें। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा को निखारने में शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की भी सराहना की। शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि नवाचार का अर्थ केवल कोई नई वस्तु बनाना नहीं, बल्कि किसी काम को नए और बेहतर तरीके से करना भी है। विद्यार्थियों को नए विचारों पर प्रयोग करने और गलतियों से सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए व्यक्ति की पृष्ठभूमि से ज्यादा उसकी मेहनत, सोच और क्षमता मायने रखती है। समारोह में जापान जाकर सीखने वाले प्रदेश के पांच प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने अपने अनुभव साझा किए और वहां सीखने के मिले अवसरों के बारे में बताया। कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चयनित छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे।
क्या है इंस्पायर–मानक योजना?
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इंस्पायर–मानक योजना का उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना है। योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को उनके मौलिक विचारों पर आधारित प्रोजेक्ट या मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके बाद विद्यार्थियों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।