
मथुरा: जनपद स्तरीय जागरूकता अभियान वर्ष 2026-27 के अंतर्गत गुरुवार को छाता स्थित उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी कार्यालय परिसर में फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को पराली न जलाने तथा फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के प्रति जागरूक किया।
आधुनिक कृषि यंत्रों से करें फसल अवशेषों का प्रबंधन
कार्यक्रम में कृषि अधिकारियों ने किसानों को बताया कि फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को खेत में ही निस्तारित करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों और तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और वेस्ट डीकंपोजर जैसी तकनीकों की जानकारी देते हुए इनके इस्तेमाल की अपील की गई। अधिकारियों ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी किसानों को सचेत किया। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है और मिट्टी में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा, पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनके प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। इससे पराली के उचित निस्तारण के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहयोग मिल सकता है। कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने कृषि विभाग की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने पराली नहीं जलाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का संकल्प लिया। अभियान के माध्यम से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बेहतर तरीकों की जानकारी देकर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया गया।