
मथुरा: जनपद के फरह ब्लॉक स्थित गांव मखदूम में जमीन के सीमांकन और कब्जा हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। जमीन की सीमा पर लगाई गई गड़ी-मुड़ियों को उखाड़ने के मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, मामले में कानूनगो के साथ हाथापाई किए जाने का आरोप भी लगाया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तहसीलदार के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच कराने की मांग उठ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तहसीलदार अमित त्रिपाठी के आदेश पर गठित प्रशासनिक टीम ने करीब 10 से 15 दिन पहले विवादित जमीन का चिन्हांकन किया था। बताया जा रहा है कि उस दौरान दोनों पक्षों की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश और सीमांकन कराया गया था। दावा है कि कार्रवाई के बाद दोनों पक्ष अपनी-अपनी जमीन की सीमाओं को लेकर संतुष्ट हो गए थे।
दोबारा कार्रवाई पर उठे सवाल
आरोप है कि 13 अक्टूबर 2026 को तहसीलदार अमित त्रिपाठी की मौजूदगी में जमीन की सीमा पर लगाई गई गड़ी-मुड़ियों को उखड़वा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद दूसरे पक्ष ने सवाल उठाए कि जब प्रशासनिक टीम पहले ही जमीन का चिन्हांकन कर चुकी थी और दोनों पक्ष संतुष्ट बताए जा रहे थे, तो करीब 10 से 15 दिन बाद दोबारा गड़ी-मुड़ियां उखाड़ने की कार्रवाई किस आदेश के तहत की गई। मामले में दूसरे पक्ष की ओर से तहसीलदार पर कथित तौर पर दूसरे पक्ष के साथ मिलीभगत करने का आरोप भी लगाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि यदि पहले हुए सीमांकन के बाद दोनों पक्ष संतुष्ट थे, तो दोबारा कार्रवाई करने की जरूरत क्यों पड़ी। साथ ही, यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या गड़ी-मुड़ियां उखाड़ने से पहले कोई नया आदेश जारी किया गया था। मामले में कानूनगो के साथ कथित हाथापाई का आरोप भी सामने आया है। ऐसे में जमीन के सीमांकन से लेकर गड़ी-मुड़ियां उखाड़ने और हाथापाई के आरोपों तक, पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। तहसीलदार के आदेश, जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया और गड़ी-मुड़ियां उखाड़ने की कार्रवाई की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही, कानूनगो के साथ कथित हाथापाई के आरोपों की सच्चाई सामने आना भी जरूरी है, ताकि पूरे मामले में तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जा सके।