इंगोहटा में जलप्रलय जैसे हालात, खेत-खलिहान जलमग्न, रास्ते हुए बंद

उत्तर प्रदेश: दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद इंगोहटा और आसपास के गांवों में जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बारिश रुके 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी खेत-खलिहान पानी में डूबे हुए हैं। गांव चारों तरफ से पानी से घिरा होने के कारण टापू जैसा दिखाई दे रहा है। जलभराव के चलते ग्रामीणों का बाहरी क्षेत्रों से संपर्क प्रभावित हुआ है और आवागमन में भी काफी परेशानी हो रही है। इंगोहटा के पास से होकर गुजरने वाला लीणा नाला लगातार उफान पर है। नाले का जलस्तर बढ़ने के कारण इंगोहटा से मुमुक्ष आश्रम तक पहुंचने वाले दोनों प्रमुख रास्ते पानी में डूब गए हैं। कई फीट पानी जमा होने के चलते इन रास्तों पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। इससे आश्रम जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश भले ही रुक गई हो, लेकिन आसपास के खेतों में जमा पानी लगातार लीणा नाले में पहुंच रहा है। इसके चलते नाले का जलस्तर कम नहीं हो पा रहा है और जलभराव की समस्या बनी हुई है। मकरांव, अछरेला, बहरेला, पाटनपुर, रोहारी और अरतरा समेत आसपास के कई गांव भी पानी से प्रभावित हैं।

खेतों में डूबी खरीफ की फसलें

जलभराव का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में खड़ी तिल, उड़द, मूंग और ज्वार समेत खरीफ की फसलें पानी में डूब गई हैं। लंबे समय से फसल तैयार करने में जुटे किसानों को अब भारी नुकसान की आशंका है। फसलों के पानी में डूबने से किसानों की मेहनत और खेती में लगी लागत प्रभावित हुई है। इंगोहटा स्थित श्रीराम जानकी गौशाला में भी पानी पहुंच गया। जलभराव बढ़ने के बाद गौशाला में मौजूद सैकड़ों गौवंश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों और गौशाला प्रबंधन ने गौवंश को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ऊंचे स्थानों की ओर पहुंचाया।

ग्रामीणों का कहना है कि हाल के वर्षों में उन्होंने इस तरह का व्यापक जलभराव नहीं देखा है। गांव के रास्ते बंद होने के कारण जहां लोगों का आवागमन प्रभावित है, वहीं पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आ गई है। लगातार पानी भरे रहने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। इसके साथ ही किसानों की पानी में डूबी फसलों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई गई है।

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