
RBI: भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने सकारात्मक अनुमान जताया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 यानी FY27 के लिए भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा दिया है। RBI ने अब आर्थिक विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले अगस्त में FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 फीसदी रखा गया था। यानी RBI ने अपने पुराने अनुमान में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी की है। RBI के इस नए अनुमान से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा रफ्तार पर भरोसा है। MPC की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अर्थव्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं का जिक्र किया और बताया कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती और लचीलापन बना हुआ है। दूसरी तिमाही के लिए भी RBI ने GDP ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी की है। पहले दूसरी तिमाही के लिए 6.3 फीसदी की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया गया है। इसी तरह तीसरी तिमाही के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया गया है। वहीं चौथी तिमाही के लिए 6.8 फीसदी का अनुमान बरकरार रखा गया है।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से मिली मजबूती
RBI के मुताबिक दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी हुई है। हालांकि, इस दौरान मानसून थोड़ा कमजोर रहा, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति अच्छी बनी हुई है। सर्विस सेक्टर में भी स्थिरता देखने को मिल रही है। इसके अलावा निजी खपत में मजबूती और निवेश में भी अच्छी स्थिति बनी रहने की बात कही गई है। RBI गवर्नर के मुताबिक घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में लचीलापन बना हुआ है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की स्थिति के साथ निजी खपत और निवेश की मजबूती को भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन परिस्थितियों के बीच केंद्रीय बैंक ने FY27 की GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है।
हालांकि, RBI ने आने वाले रबी सीजन को लेकर एक जोखिम की ओर भी इशारा किया है। केंद्रीय बैंक ने अल नीनो के संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। मानसून और मौसम से जुड़े बदलाव कृषि गतिविधियों पर असर डाल सकते हैं, इसलिए आने वाले समय में इस मोर्चे पर भी नजर बनी रहेगी। वैश्विक स्तर पर भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। वेस्ट एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों के बावजूद RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर भरोसा है। इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच घरेलू आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है। इसके अलावा भारत की GDP ग्रोथ को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमानों में भी बदलाव देखने को मिला है। इससे पहले मूडीज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया था। वहीं विश्व बैंक ने भी FY27 के लिए अपने अनुमान को 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया।
हालांकि, मूडीज और विश्व बैंक दोनों ने वेस्ट एशिया संकट, ऊर्जा की कीमतों, महंगाई और मानसून से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया है। इन चुनौतियों के बावजूद विश्व बैंक को उम्मीद है कि अगर बाहरी परिस्थितियों में सुधार होता है तो भारत की विकास दर में आगे और तेजी आ सकती है। मध्यम अवधि में विकास दर 7 फीसदी से ऊपर बने रहने की उम्मीद भी जताई गई है। इस तरह RBI के ताजा अनुमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ-साथ संभावित जोखिमों को भी रेखांकित किया गया है। FY27 के लिए 7.1 फीसदी GDP ग्रोथ का अनुमान घरेलू आर्थिक गतिविधियों, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, निजी खपत और निवेश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बढ़ाया गया है।