
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है। सोमवार को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया। दोनों नेताओं की जमानत प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी। अब दोनों को बुधवार को फिर से पेश किया जाएगा। दोनों नेताओं के वकील के मुताबिक, जमानत के लिए पेश किए गए दस्तावेजों में कथित अंतर के कारण उनकी जमानत की श्योरिटी स्वीकार नहीं की गई। वकीलों ने अदालत में नए दस्तावेज पेश किए थे, लेकिन सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से एक नया आवेदन दिया गया। इसमें पांच से सात दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत की मांग की गई थी।
वकीलों ने हिरासत पर उठाए सवाल
CJP नेताओं के वकील ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत से जुड़े दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना था। सोमवार को नए जमानत दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन इसके बाद राज्य की ओर से हिरासत बढ़ाने की मांग की गई। वकील ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं है और न ही कोई लंबित मामला या जांच है, जिसके लिए उनसे पूछताछ की आवश्यकता हो। वकील के अनुसार, राज्य की ओर से सार्वजनिक व्यवस्था और शांति भंग होने की आशंका का हवाला देते हुए हिरासत जारी रखने की मांग की गई। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं को इस आशंका के आधार पर हिरासत में रखा गया है कि वे दोबारा विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। वकील ने कहा कि वे इस मामले में कानूनी तरीके से आगे कार्रवाई करेंगे।
आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। CJP के 12 अन्य सदस्यों के साथ दोनों नेताओं पर कथित तौर पर बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को रोकने का आरोप है। बताया गया है कि जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान नहीं है। दोनों नेताओं को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब हिरासत दो दिन और बढ़ने के बाद उनकी रिहाई के लिए बुधवार की पेशी महत्वपूर्ण होगी। इस बीच, CJP की ओर से आरोप लगाया गया है कि जमानत की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है, ताकि उसके दोनों संयोजकों की रिहाई न हो सके। हालांकि, हिरासत और जमानत से जुड़े मामले में आगे की कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।