
उत्तर प्रदेश: देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने थाने में लगे CCTV कैमरों की स्थिति और हिरासत के दौरान की रिकॉर्डिंग को लेकर पुलिस से जवाब मांगा। पुलिस की ओर से दी गई सफाई से अदालत संतुष्ट नहीं हुई और अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। मामला 13 से 23 अप्रैल 2026 के बीच चार लोगों को गौरी बाजार थाने में कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस अवधि से संबंधित थाने का CCTV फुटेज पेश करने को कहा। अदालत के निर्देश पर जब फुटेज को लेकर जानकारी मांगी गई तो थाना प्रभारी (SHO) ने बताया कि 12 अप्रैल को CCTV खराब हो गया था।
CCTV खराब होने पर उठे सवाल
अदालत ने जब CCTV खराब होने की बात सुनी तो इस संबंध में रिकॉर्ड भी मांगा। हालांकि, CCTV खराब होने के बाद उसकी मरम्मत कराए जाने को लेकर कोई GD एंट्री नहीं मिली। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि यदि CCTV वास्तव में खराब हुआ था तो उसकी खराबी और मरम्मत से संबंधित रिकॉर्ड थाने के दस्तावेजों में क्यों नहीं है। सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) की ओर से अदालत से माफी मांगी गई। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “कोर्ट से माफी मत मांगो, जनता से माफी मांगो।” अदालत की यह टिप्पणी पुलिस अधिकारियों के प्रति नाराजगी को स्पष्ट करती है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों के खिलाफ जुर्माने की बात भी कही। अदालत ने अधिकारियों से 5-5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाए जाने की बात कही। इसके साथ ही चारों याचिकाकर्ताओं को कुल 65 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की यह रकम संबंधित थाना प्रभारी (SHO) की सैलरी से वसूली जाएगी। मामले में कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली और हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।