मेरठ में 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते कानूनगो रंगे हाथ गिरफ्तार, तहसील में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश: मेरठ में रिश्वतखोरी के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने एक कानूनगो को कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। अचानक हुई इस कार्रवाई से तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही तहसील में मौजूद कर्मचारियों के बीच भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया गया कि एंटी करप्शन टीम ने पूरी कार्रवाई के दौरान आरोपी कानूनगो को मौके से हिरासत में लिया। इसके बाद टीम ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी। कानूनगो की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

मेडिकल के बाद देहली गेट थाने पहुंची टीम

कानूनगो को हिरासत में लेने के बाद एंटी करप्शन टीम ने नियमानुसार उसका मेडिकल परीक्षण कराया। मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीम आरोपी कानूनगो को लेकर देहली गेट थाने पहुंची। थाने में मामले से जुड़ी आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एंटी करप्शन टीम की अचानक हुई कार्रवाई से तहसील परिसर में काफी देर तक हलचल का माहौल रहा। कानूनगो के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर के बाद तहसील के कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। कार्रवाई के बाद अब इस पूरे मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कानूनगो ने कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत किस काम के बदले मांगी थी। इसके साथ ही एंटी करप्शन टीम यह भी जांच कर रही है कि रिश्वत की इस कथित मांग और पूरे मामले में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल था या नहीं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि रिश्वत की रकम से जुड़ा पूरा घटनाक्रम क्या था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल एंटी करप्शन टीम आरोपी कानूनगो से पूछताछ कर रही है और उसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कानूनगो की कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी के बाद तहसील परिसर में प्रशासनिक अमले के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई को रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। अब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा कि इस मामले में रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई थी और क्या इसके पीछे किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भी भूमिका थी।

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