
दिल्ली: मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने छात्रा की हिरासत को रद्द कर दिया है और इस कार्रवाई को मनमाना बताया है। कोर्ट के मुताबिक, NSA जैसे कड़े कानून के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए पर्याप्त आधार होना जरूरी है, लेकिन इस मामले में कार्रवाई के लिए जरूरी आधार मौजूद नहीं थे। आकृति चौधरी करीब पांच महीने तक हिरासत में रही थीं। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को उन्हें ₹5 लाख का मुआवजा देना होगा। अदालत के इस फैसले से छात्रा को NSA के तहत हुई हिरासत के मामले में बड़ी राहत मिली है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार छात्रा के खिलाफ कुछ अन्य मामले भी लंबित हैं। ऐसे में NSA की हिरासत रद्द होने के बावजूद वह अन्य मामलों के चलते जेल में रह सकती हैं।
मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े इस मामले में छात्रा के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। अब हाईकोर्ट द्वारा हिरासत को मनमाना बताए जाने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। खास तौर पर इस बात पर बहस हो रही है कि किसी मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे कड़े प्रावधानों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जाना चाहिए और इसके लिए कितने मजबूत आधार की जरूरत होती है। मामले से नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम का नाम भी जुड़ा है। छात्रा की NSA हिरासत से संबंधित कार्रवाई और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर उनका नाम रिपोर्टों में सामने आया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई भी चर्चा के केंद्र में है।
मुआवजे का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की हिरासत को रद्द करने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत के फैसले में NSA के तहत की गई कार्रवाई के आधार पर भी सवाल उठे हैं। कोर्ट ने माना कि इस तरह की कठोर कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार होना जरूरी है और मौजूदा मामले में हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे। इस फैसले ने प्रशासनिक कार्रवाई और मौलिक अधिकारों से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। किसी व्यक्ति के खिलाफ कड़े कानून के इस्तेमाल और उसकी हिरासत को लेकर कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना जरूरी है, इस पर भी चर्चा हो रही है। आकृति चौधरी के करीब पांच महीने तक हिरासत में रहने और अब अदालत द्वारा हिरासत रद्द किए जाने से मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि, छात्रा की स्थिति को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि NSA की हिरासत रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि अन्य मामलों में भी उन्हें स्वतः राहत मिल गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, अन्य लंबित मामलों के कारण उनके जेल में रहने की संभावना है। इसलिए उनकी आगे की स्थिति उन मामलों में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगी। वहीं, इस मामले से जुड़ी कुछ राजनीतिक चर्चाओं में आकृति चौधरी के पिता ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वर्ष 2029 के बाद जांच किए जाने का दावा भी किया जा रहा है। लेकिन इस दावे की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे तथ्य के बजाय राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।