
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के तहत सड़क के एक हिस्से पर डबल डेकर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके बनने से ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
756 करोड़ रुपये होंगे खर्च
परियोजना के पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाने की योजना है। इस चरण के निर्माण पर करीब 756.01 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसके बाद परियोजना के दूसरे चरण में सड़क के बाकी हिस्से का निर्माण किया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को दी गई थी। इसके लिए कराए गए सर्वे में दो वैकल्पिक मार्ग सामने आए थे। संबंधित समिति ने दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाने के विकल्प को मंजूरी दी है।
चार प्राधिकरण मिलकर उठाएंगे लागत
परियोजना के दूसरे चरण में 130 मीटर चौड़ी सड़क के बचे हुए हिस्से का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना की लागत को लेकर भी बोर्ड बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। निर्माण की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरण समान रूप से वहन करेंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक से मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए नोएडा और यीडा की सहमति ली जाएगी। संबंधित प्राधिकरणों की सहमति मिलने के बाद परियोजना पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस सड़क के निर्माण से ग्रेटर नोएडा की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट से आने-जाने वाले लोगों को इससे फायदा हो सकता है। डबल डेकर सड़क बनने के बाद मौजूदा सड़क नेटवर्क पर दबाव कम करने और एक्सप्रेसवे तक पहुंच को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब आगे की प्रक्रिया नोएडा और यीडा की सहमति पर निर्भर होगी। सभी संबंधित प्राधिकरणों के बीच समन्वय के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।