
ग्रेटर नोएडा: दादरी स्थित सेंट हुड कॉन्वेंट स्कूल में भारतीय संस्कृति की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा, गुरुजनों के प्रति सम्मान और नैतिक मूल्यों को समर्पित विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत विकास परिषद की ओर से श्री एन.के. शर्मा अपनी टीम के साथ विद्यालय पहुंचे। इस अवसर पर शिक्षकों, विद्यार्थियों, विद्यालय की प्रधानाचार्या और संस्थान को सम्मानित किया गया। समारोह के माध्यम से शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व का संदेश दिया गया।
शिक्षकों और विद्यार्थियों को किया सम्मानित, गुरु के मार्गदर्शन को बताया महत्वपूर्ण
समारोह के दौरान भारत विकास परिषद की ओर से विद्यालय की एकेडमिक कोऑर्डिनेटर सुश्री दिव्या गोले और पीजीटी श्री ओपेंद्र को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों अंश, अनिकेश और भूमिका शर्मा को भी सम्मान प्रदान किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. आशा शर्मा तथा विद्यालय को भी सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षकों और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करना तथा उनमें नैतिक संस्कारों और आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री एन.के. शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु का कार्य केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में सही दिशा दिखाना भी है। शिक्षक विद्यार्थियों में नैतिक संस्कार, अनुशासन और आदर्शों का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गुरु का मार्गदर्शन शिष्य के व्यक्तित्व निर्माण और उसके जीवन को सही दिशा देने में सहायक होता है। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य और अर्जुन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को एकाग्रता, समर्पण और अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने के साथ शिक्षकों के मार्गदर्शन को गंभीरता से अपनाना चाहिए।
एन.के. शर्मा ने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने गुरुजनों के प्रति आदर और कृतज्ञता की भावना को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा प्राप्त करने के साथ अच्छे संस्कारों और जीवन मूल्यों को अपनाना भी आवश्यक है। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. आशा शर्मा ने भारत विकास परिषद की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मान समारोह विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, कृतज्ञता और गुरुजनों के प्रति आदर की भावना को मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को शिक्षा के व्यापक उद्देश्य से परिचित कराते हैं और उन्हें अपने व्यवहार तथा व्यक्तित्व में अच्छे गुण विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, संस्कारवान और आदर्श नागरिक बनाना भी है। शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का विकास होने से विद्यार्थी जीवन में सही निर्णय लेने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। यह परंपरा पीढ़ियों से ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाती आ रही है। गुरु का सम्मान करना और उनके मार्गदर्शन से सीखना भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यक्रम का समापन गुरुजनों के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने के संदेश के साथ हुआ। यह आयोजन विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, कृतज्ञता और आदर्शों के महत्व से जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।