
नई दिल्ली: विजयादशमी का पर्व इस बार 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इसे दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इस दिन देशभर में लोग पूजा-पाठ करते हैं और कई परंपराओं का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर कुछ वस्तुओं की खरीदारी करना और नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन घर में कुछ विशेष चीजें लाने से सुख-समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। विजयादशमी हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व का संबंध दो प्रमुख धार्मिक प्रसंगों से है। एक ओर यह भगवान श्रीराम द्वारा लंकापति रावण का वध किए जाने और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, तो दूसरी ओर इसे मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने की स्मृति में भी मनाया जाता है। शारदीय नवरात्र के समापन के साथ इस दिन कई स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है। दशहरे के अवसर पर लोग अपने घरों में पूजा-अर्चना करने के साथ ही नई वस्तुएं खरीदते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष माना गया है। ऐसे में कई लोग सोना-चांदी खरीदने से लेकर घर के उपयोग की वस्तुएं लाने तक की परंपरा निभाते हैं।
दशहरे पर इन चीजों की खरीदारी मानी जाती है शुभ
विजयादशमी के दिन कुछ वस्तुओं को खरीदना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। हालांकि, इनसे जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
सोना-चांदी खरीदना
दशहरे पर सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई खरीदारी को समृद्धि और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि कई लोग विजयादशमी के अवसर पर सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदना पसंद करते हैं।
नया वाहन खरीदना
विजयादशमी को नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ दिन माना जाता है। इसी मान्यता के चलते कई लोग इस अवसर पर कार, बाइक या अन्य वाहन खरीदते हैं। कुछ परिवार इस दिन नए वाहन की पूजा भी करते हैं और उसके अच्छे उपयोग की कामना करते हैं।
तांबे और पीतल के बर्तन
अगर आप सोना-चांदी या वाहन खरीदने की योजना नहीं बना रहे हैं, तो घर के लिए तांबे और पीतल के बर्तन भी खरीद सकते हैं। परंपरागत रूप से इन धातुओं के बर्तनों को शुभ अवसरों पर घर लाने की परंपरा रही है। दशहरे पर भी कई लोग इन्हें खरीदना पसंद करते हैं।
नई झाड़ू घर लाना
दशहरे पर नई झाड़ू खरीदने की भी मान्यता है। इसे घर की साफ-सफाई और व्यवस्था से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन झाड़ू घर लाना शुभ माना जाता है और इसे दरिद्रता दूर होने की कामना से भी जोड़ा जाता है।
शमी का पौधा खरीदना
विजयादशमी पर शमी के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन शमी का पौधा घर में लगाना और उसकी पूजा करना शुभ परंपरा का हिस्सा है। कई स्थानों पर शमी के पत्तों को प्रतीकात्मक रूप से सोना मानकर एक-दूसरे को देने की परंपरा भी निभाई जाती है।
किताबें और धार्मिक ग्रंथ खरीदना
दशहरे के दिन बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी वस्तुएं, जैसे किताबें, पेन और कॉपियां खरीदना भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा धार्मिक ग्रंथ घर लाने को भी शुभ कार्यों में शामिल किया जाता है। यह परंपरा ज्ञान, शिक्षा और अध्ययन के प्रति सम्मान से जुड़ी है।
नए कपड़े खरीदना
त्योहारों पर नए कपड़े खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है। विजयादशमी के अवसर पर परिवार के सदस्यों, बच्चों और माता-पिता के लिए नए कपड़े खरीदे जा सकते हैं। कई लोग इस दिन नए वस्त्र पहनकर पूजा-अर्चना करते हैं और त्योहार मनाते हैं।
दशहरे पर घर में करें ये शुभ कार्य
विजयादशमी के दिन खरीदारी के साथ-साथ घर में कुछ धार्मिक और पारंपरिक कार्य करना भी शुभ माना जाता है। इस अवसर पर घर की सफाई करने, पूजा स्थल को व्यवस्थित रखने और परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर की साफ-सफाई करें। मुख्य दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण लगाना और रंगोली बनाना भी कई घरों में त्योहार की तैयारियों का हिस्सा होता है। इससे घर में उत्सव का माहौल बनता है।
इस दिन भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की पूजा करने की भी परंपरा है। श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं। रामरक्षा स्तोत्र, दुर्गा चालीसा और आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। इसके अलावा घर में रखे वाहनों, औजारों और अन्य उपयोगी उपकरणों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करने की परंपरा को आयुध पूजा कहा जाता है। शमी वृक्ष की पूजा भी विजयादशमी के प्रमुख पारंपरिक कार्यों में शामिल है। मान्यता के अनुसार, इस दिन शमी के पौधे की पूजा करके सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। कुछ क्षेत्रों में लोग शमी के पत्ते एक-दूसरे को देकर शुभकामनाएं भी देते हैं।
शाम के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। कुछ लोग चौमुखी दीपक जलाते हैं और घर की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। वहीं, रावण दहन के बाद उसकी राख या लकड़ी को घर लाने से जुड़ी कुछ क्षेत्रीय मान्यताएं भी प्रचलित हैं। हालांकि, ऐसी परंपराओं का पालन स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाता है। कुल मिलाकर, विजयादशमी का पर्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूजा-पाठ, पारिवारिक परंपराओं और अच्छे कार्यों की शुरुआत से भी जुड़ा है। इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार शुभ वस्तुएं खरीदकर तथा धार्मिक परंपराओं का पालन करके त्योहार मनाया जा सकता है।