नोएडा: शहरभर में सड़कों के किनारे लगे बड़े-बड़े विज्ञापन पोल से अचानक विज्ञापन हटाए जाने की कार्रवाई ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साथ बड़े स्तर पर हुई इस कार्रवाई से विज्ञापन एजेंसियों में भी हलचल है। अब सवाल उठ रहा है कि अगर इन विज्ञापन पोल पर लगे विज्ञापन नियमों के खिलाफ थे तो प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था इतने समय तक क्या कर रही थी।
निगरानी पर सवाल
शहर के प्रमुख मार्गों और व्यस्त इलाकों में ये विज्ञापन पोल अचानक खड़े नहीं हुए थे। इनके निर्माण से लेकर उन पर विज्ञापन लगाए जाने तक पूरी प्रक्रिया संबंधित विभागों की नजर में रही होगी। ऐसे में अब एक साथ विज्ञापन हटाए जाने के बाद निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
किसके आदेश पर कार्रवाई
कार्रवाई के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि आखिर किसके आदेश पर विज्ञापन हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई और इसकी वास्तविक वजह क्या है। क्या सभी विज्ञापन पोल की अनुमति और दस्तावेजों की जांच की गई थी या फिर बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के कार्रवाई की जा रही है।
एजेंसियों पर क्या कार्रवाई
जिन एजेंसियों ने इन पोल पर विज्ञापन लगाए, उनके खिलाफ प्राधिकरण ने अब तक क्या कार्रवाई की, यह भी बड़ा सवाल है। कितने नोटिस जारी किए गए, कितनी पेनल्टी लगाई गई और नियमों के विपरीत लगे विज्ञापनों से प्राधिकरण को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है।
जिम्मेदारी किसकी होगी
अगर इन विज्ञापन पोल को लगाने की अनुमति प्राधिकरण के किसी विभाग की ओर से दी गई थी तो उस अनुमति की जांच कौन करेगा और जिम्मेदारी किसकी तय होगी। सवाल यह भी है कि बिना अनुमति के इतने बड़े ढांचे शहर की सड़कों पर कैसे खड़े हो गए।
अब जवाबदेही का सवाल
कार्रवाई के बाद अब मुद्दा सिर्फ विज्ञापन हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही का भी है। नोएडा प्राधिकरण को स्पष्ट करना होगा कि नियमों के विपरीत विज्ञापन पोल लगाने वालों पर क्या कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।